रात को दूध चुराकर पीते थे धीरूभाई, 1 आइसक्रीम के लिए दांव पर लगाई थी जान !

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अगर धीरूभाई अंबानी जिंदा होते तो 28 दिसंबर को अपना 84वां जन्मदिन मनाते। बचपन से लेकर अभी तक उनकी जिंदगी के हर पहलू के बारे में बहुत लिखा जा चुका है। केवल मई 1950 में नौकरी के लिए यमन जाने से लेकर दिसंबर 1958 में रिलायंस कंपनी खोलने के लिए वापस इंडिया आने तक के 8 साल ही ऐसे हैं, जिनके बारे में सबसे कम जानकारी मिलती है।
इस दौरान धीरूभाई ने यमन में पेट्रोलियम कंपनी में काम करते हुए 200 रुपए मंथली सैलरी से लेकर 1100 रुपए सैलरी तक का सफर तय किया। दैनिक भास्कर की टीम  धीरूभाई के इन्हीं 8 सालों की असली कहानी जानने यमन में साथ काम किए धीरूभाई के दोस्तों के पास पहुंचे । खोज निकाला उस दौर के 3 ऐसे लोगों को जिन्होंने या तो धीरूभाई के साथ उस समय कंपनी में साथ काम किया था या उस दौरान उनसे करीब से जुड़े रहे। इनमें से कुछ लोग 2002 में कभी देश के सबसे अमीर इंसान धीरूभाई की मौत के बाद भी अंबानी परिवार से लंबे समय तक टच में रहे। मीडिया में ऐसा पहली बार हुआ है, जब एक साथ 3 करीबी धीरूभाई अंबानी की यमन में संघर्षपूर्ण नौकरी के दौरान की अनसुनी कहानियां सुनाने जा रहे हैं।
1st कहानी @ जब आइसक्रीम पार्टी के लिए धीरूभाई ने शार्क के बीच लगाया समुद्र में गोता
– उस दौर में धीरूभाई के साथ काम करने वाले हिम्मत भाई जगानी के बेटे परूभाई जगानी के मुताबिक, ‘जब शुरुआत में धीरू दादा यमन आए तो उनकी बहुत खिंचाई होती थी। एक बार शाम को शिफ्ट खत्म होने के बाद सबने धीरूभाई से समुद्र में कूदकर 2 मिनट नीचे रहने की शर्त लगाई।’
– ‘धीरू ने शर्त तुरंत मान ली। लेकिन जीतने पर इनाम में आइसक्रीम पार्टी लेने को कहा। इनाम पर मंजूरी के बाद वो समुद्र में कूदे। 2 मिनट नीचे रहकर। वापस जहाज पर आ गए।’
– ये देख वहां मौजूद सभी लोग दंग रह गए। कारण समुद्र में शार्क आने की जानकारी के बावजूद धीरूभाई का शर्त जीतना था।
– उस दिन के बाद से लोगों ने धीरू की खिंचाई बंद कर दी थी। इतना ही नहीं, उसके बाद से साथ के कई लोग खाली समय में धीरूभाई से समुद्र में स्विमिंग भी सीखने लगे।

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