रात को दूध चुराकर पीते थे धीरूभाई, 1 आइसक्रीम के लिए दांव पर लगाई थी जान !

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5th कहानी @ जब धीरूभाई ने दोस्त से कहा मैंने रिलायंस नाम चोरी किया है… इसने मेरे दोस्त को मर्सडीज दिलाया है..’

– धीरूभाई ने जिस रिलायंस नाम की कंपनी खोली थी, वो नाम उन्होंने अपने यमन के दोस्त प्रवीणभाई ठक्कर से उधार लिया था।
– 2002 में दिए एक इंटरव्यू में प्रवीण ने बताया था, ‘रिलायंस नाम धीरूभाई ने मुझसे उधार लिया था। 1953 में मैंने रोलेक्स और कैनन की एजेंसी ली और रिलायंस स्टोर नाम रखा। स्टोर चल निकला और कुछ ही सालों में मेरे पास मर्सडीज थी।’
– ‘ये देखकर धीरूभाई मेरे पास आए और बोले मुझे रिलायंस नाम पसंद है। ये नाम कस्टमर के भरोसे को दर्शाता है। और इसी नाम के स्टोर के चलते मेरे सामने देखते ही देखते तुमने मर्सडीज जैसी महंगी कार ले ली। वाकई में रिलायंस लकी नाम है। मुझे ये नाम दे दो।’
– ठक्कर ने इंटरव्यू में बताया कि इस चर्चा के कुछ महीनों बाद धीरूभाई ने शादी कर ली। बाद में 3000 डॉलर की सेविंग के साथ इंडिया आकर रिलायंस नाम से कंपनी खोली।
– 1977 में राजकोट की रिलायंस इंडस्ट्रीज की एक मीटिंग में धीरूभाई ने खुद ये बात कबूल की थी कि उन्होंने रिलायंस नाम अपने दोस्त से चोरी करके रखा है, जो साउथ यमन में रिलायंस नाम का स्टोर चलाकर बड़ा आदमी बन गया था।
– हालांकि, इस नाम के लिए धीरूभाई ने राजकोट में विमल के 2 स्टोर अपने दोस्त ठक्कर के नाम कर दिए थे। इस वाकये ने धीरू और प्रवीण की एडन की दोस्ती को मजबूती दी थी।
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