रात को दूध चुराकर पीते थे धीरूभाई, 1 आइसक्रीम के लिए दांव पर लगाई थी जान !

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8th कहानी @ 1100 रुपए थी लास्ट सैलरी.. दोस्त चाहते थे लंदन में चलकर बिजनेस करें धीरूभाई
– 1958 में जब यमन आजाद हो रहा था, तब वहां के हालात के चलते सभी कंपनियों से काम छोड़कर लोग जाने लगे थे।
– धीरूभाई के कई दोस्तों ने यमन से लंदन बसने का प्लान किया। धीरूभाई को भी वहां चलकर रिलायंस कंपनी स्टार्ट करने को कहा। लेकिन धीरूभाई ने अपने देश में बिजनेस करने की बात कहकर मना दिया।
– दिसंबर 1958 में धीरूभाई ने जब यमन की नौकरी छोड़ी थी, तब उनकी लास्ट सैलरी 1100 रुपए महीना था। और वो 3000 डॉलर की सेविंग लेकर इंडिया आए थे।