बेटी की डेडबॉडी उठते ही दौड़ी मां, लोग बोले- वाहे गुरु किसी को न दिखाना ऐसा दिन

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इंदौर. एक के बाद एक चार बच्चों की अंतिम यात्रा निकलते देख हर आंख नम हो गई। हजारों लोग शहर के रीजनल पार्क पर मुक्तिधाम पर बच्चों को अंतिम विदाई देने पहुंचे। शहर के एक परिवार की 9 साल की बेटी हरमीत की जब अंतिम यात्रा निकली तो मां शव के पीछे दौड़ पड़ी। इसके बाद जैसे तैसे बेटे ने अपनी मां को संभाला। इससे पहले जैसे ही बेटी की डेडबॉडी घर आई तो मां बिलख पड़ी।

सफेद चादर में लिपटी थी बेटी…. खातीवाला टैंक के आर सेक्टर में 9 साल की हरमीत का शव सुबह जैसे ही घर लेकर पहुंचे मां जसप्रीत कौर फफक कर बेटी से लिपट गईं।  पिता गुरजीत सिंह और बेटा सहजवीर भी लिपट गए। अपनी लाड़ली को सफेद चादर (कफन) में लिपटा देख वे फूट-फूटकर रो पड़े। इकलौती बहन के पास से भाई उठने को राजी नहीं था। रिश्तेदारों ने जैसे-तैसे उसे संभाला। जैसे ही शव ले जाने के पूर्व अरदास हुई तो मां, पिता और भाई की आंख से आंसू की धारा बह निकली। तीनों खुद को रोक नहीं पाए। जैसे ही अंतिम यात्रा के लिए शव बाहर लाए मां अर्थी के पीछे दौड़ पड़ीं। लोगों ने रोका तो सड़क पर सिर पटककर जान देने की कोशिश करने लगी।  भाई गुरमीत ने जैसे-तैसे उन्हें संभाला। ये दृश्य देख हर शख्स रो पड़ा। सभी यही बोल रहे थे कि वाहे गुरु ये दिन किसी को न दिखाए।

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