एक Idea ने बदली तकदीर, कबाड़ से कमा लिए 5 करोड़ रुपए

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वाराणसी.बिहार के रहने वाले तीन इंजीनियर भाइयों ने एक आइडि‍या से अपनी तकरीर बदल दी। कूड़े-कबाड़ से शुरू किए गए बिजनेस का टर्नअोवर महज तीन साल में 5 करोड़ से ज्यादा पहुंच गया। स्वामी विवेकानंद की बर्थ एनिवर्सि‍री पर 12 जनवरी को नेशनल यूथ डे के रूप में मनाया जाता है। इस मौके पर आपको कूड़े से करोड़ों का कारोबार करने वाले इन तीन भाइयों की सक्सेज स्टोरी बता रहे है।

बनारस की सड़कों पर गंदगी देख आया आइडि‍या…  बिहार के रहने वाले विश्वेश कुमार ने बैंगलुरु से 2014 में कम्प्यूटर साइंस किया, दीपक सिंह ने पुणे इंजीनियरिंग कॉलेज से 2014 में ही इंजीनियरिंग और एमबीए किया और प्रिंस सिंह ने इसी साल एमबीए मार्केटिंग से किया। तीनों भाई हैं। दीपक ने बताया, ”जून 2014 में सिस्टर की शादी बनारस में थी, फंक्शन में पूरी फैमिली पहुंची थी। हम तीनों भाई भी पहुंचे थे।” विश्वेश ने बताया, ”बनारस में कुछ दिन बिताए तो दिखा कि सड़कों पर बहुत गंदगी फैली थी। आइडिया आया कि जो वेस्ट रिसाइकिल कर सकते हैं, उसे भी फेंक दिया जाता है। अखबार, किताब, पन्ने, स्क्रैप से र‍िलेटेड चीजों के लिए कई महीने कबाड़ी वालों से बातचीत चली।” ”इस दौरान परिवारवालों ने भी सपोर्ट नहीं किया, घरवालों ने कहा- पढ़-लिखकर कबाड़ बेचोगे। लेकिन, हमने अपने फैसले को बदला नहीं और अागे बढ़ते गए।” प्रिंस ने बताया, ”मैं 30 हजार की नौकरी करता था, सुबह जगता था तो यही सोचता था कि कुछ ऐसा जनरेट हो की खुद का काम हो। विश्वेश ने आइडिया शेयर किया, जो अच्छा लगा। ”कबाड़ को लेकर डोर-टू-डोर सर्वे किया। अन ऑर्गनाइज सेक्टर था, कालबाजारी बहुत थी। हमने प्रॉपर तरीके से काम करना शुरू किया।” ”सेल कबाड़ी डॉट काम’ के जरिए कूड़ा डोर-टू-डोर खरीदा। इसके बाद परिवार से 10 लाख रुपए लेकर बिजनेस स्टार्ट किया। आज 5 करोड़ से ज्यादा का टर्नअोवर है। दो करोड़ कीमत का डंपिंग ग्राउंड है।” ”हमारे अंडर में कुल 25 लोगों का स्टॉफ काम करता है। जल्द ही ई-वेस्ट डम्पिंग सेंटर बनाएंगे।” प्रि‍ंस ने बताया कि जो लोग कभी ताने देते थे कि वो अब पार्टनर बनना चाहते हैं।

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